Thursday, November 20, 2014

Ten misconceptions about sexual power




भारतीय समाज में चूंकि सेक्स के टॉपिक पर खुलेआम बातें नहीं की जाती हैं, इसलिए अक्सर लोग हकीकत से पूरी तरह वाकिफ नहीं हो पाते और भ्रम के श‍िकार हो जाते हैं. लोगों की जानकारियां ज्यादातर सुनी-सुनाई बातों पर आधारित होती हैं. अधकचरे सेक्स गाइड या विज्ञापनों से भी कोई फायदा नहीं मिलता.

ऐसे में सेक्स पावर बढ़ाने के चक्कर में लोग गलतियां कर बैठते हैं. ऐसी 10 गलतियों की लिस्ट यहां दी जा रही है...
1. 'बचपन की गलतियां' दूर करने वाली दवाएं

ट्रेनों के भीतर और रेलवे लाइनों के इर्द-गिर्द अक्सर ऐसे विज्ञापन दिखते हैं, जिनमें 'बचपन की गलतियों' से पैदा हुई कमजोरी दूर करने के दावे किए जाते हैं. मेडिकल साइंस के मुताबिक, हस्तमैथुन से शारीरिक तौर पर कोई नुकसान नहीं पहुंचता है. नुकसान केवल तब हो सकता है, जब कोई यह धारणा बना बैठे कि उसे हस्तमैथुन से नुकसान हो रहा है. दरअसल, नुकसान केवल गलतफहमी पालने से होता है. यहां गौर करने वाली बात यह है कि अति तो हर चीज की बुरी होती है. यह बात यहां भी सटीक बैठती है.

2. सेक्स पावर बढ़ाने के लिए तेल का इस्तेमाल

अक्सर ऐसे विज्ञापन नजर आ जाते हैं, जिसमें यह दावा किया जाता है कि अमुक तेल के इस्तेमाल से सेक्स की क्षमता में बढ़ोतरी होती है और सेक्स के दौरान भरपूर आनंद आता है. हकीकत यह है कि इस तरह के किसी तेल से कोई फायदा नहीं होता है. भ्रामक विज्ञापन देने वाली कंपनियों का बिजनेस तो खूब बढ़ता है. पर इसे इस्तेमाल करने वाले लोग खुद को ठगा महसूस करते हैं. सांडे का तेल सेक्स पावर बढ़ाने वाला माना जाता है. इस बात की सच्चाई साबित नहीं की जा सकी है.
3. टॉनिक की तरफ भी आकर्ष‍ित होते हैं लोग

कुकुरमुत्ते की तरह छाए टॉनिक के विज्ञापनों भी लोगों का ध्यान इस ओर खींचते हैं. यह कवायद भी बेकार साबित होती है. इन टॉनिकों के बारे में एक कहावत भी है, 'टॉनिक पीजिए और सुनहरा पेशाब कीजिए'.
4. अश्लील किताबों का जाल

कई बार लोग किसी के कहने पर अश्लील किताबें इस उम्मीद में पढ़ते हैं कि इससे कामोत्तेजना में बढ़ोतरी होती है. यह धारणा भी गलत है. दरअसल इस तरह की किताबें वासना भड़काती तो हैं, पर आगे चलकर नुकसानदेह ही साबित होती हैं.
5. अंडे से गरमाहट पैदा करने की चाह

कुछ लोग ऐसा मानते हैं कि अंडे खाने से शरीर में गर्मी आती है, जिससे सेक्स के दौरान फायदा होता है. बादाम, असली, सोंठ आदि चीजें भी गर्म तासीर वाली मानी जाती हैं. पर यौन-संबंध के दौरान शायद ही इसका कोई फायदा मिलता हो.

6. कुछ चीजों के खान-पान में परहेज

पुरानी विद्याओं के मुताबिक यह माना जाता है कि खट्टी चीजें खाने से वीर्य पतला होता है और इससे काफी नुकसान होता है. सुनी-सुनाई बातों के आधार पर लोग कुछ चीजों से परहेज करते हैं. अचार, खटाई, गोलगप्पे आदि ऐसी की चीजों में शुमार हैं.

7. शराब भी सेक्स के लिए खराब

रति-क्रिया के आनंद को बढ़ाने में शराब भी कोई मदद नहीं करती है. दरअसल, शराब क्षण‍िक उत्तेजना तो पैदा करती है, लेकिन बाद में लोगों को एकदम श‍िथ‍िल बनाकर छोड़ती है. लंबे वक्त तक इसके सेवन से सेक्स की क्षमता बढ़ने के बदले धीरे-धीरे कम होने लगती है.
8. सड़कछाप दवाइयां व नुस्खे

कई बार लोग सड़कों के किनारे तंबू लगाए बाबाओं की दुकानों से दवा खरीदते देखे जाते हैं. ऐसी दवाओं के नाम पर यहां कुछ जड़ी-बूटी आदि रखी होती है. लोग यह सोच नहीं पाते कि अगर इनकी दवाओं में सचमुच असर करने की ताकत होती, तो ये अपना माल बेचकर रातोंरात मालामाल न हो गए होते.
9. लिंग बढ़ाने वाले अन्य प्रोडक्ट

कई विज्ञापनों में खास तरह के यंत्र या सेक्स टॉय के बारे में ऐसा दावा किया जाता है कि इससे लिंग में बढ़ातरी होती है. ऐसा कोई भी प्रोडक्स फायदा नहीं पहुंचाता है. मेडिकल साइंस के मुताबिक लिंग की लंबाई ज्यादा या कम होने का सेक्स के आनंद से कोई लेना-देना नहीं है. इसके बावजूद कुछ लोग लंबाई बढ़ाने की नाकाम कोश‍िश करते हैं. 

10. तंत्र-मंत्र या टोटकों का सहारा

अंधविश्वास के श‍िकार लोग तंत्र-मंत्र और टोने-टोटकों का भी सहारा लेते हैं. कुछ जानवरों के अंग ताबीज बनाकर धारण करने की बात भी किताबों में पाई जाती है. कई बार लोग बाबाओं के चक्कर में पड़कर बुरी तरह ठगे जाते हैं और इनसे पिंड नहीं छूटने पर कंगाल तक हो जाते हैं.
कुल मिलाकर, मामला यह है कि अगर पाचन-शक्त‍ि दुरुस्त कर ली जाए, तो शरीर स्वाभाविक रूप से पुष्ट बन जाता है. इससे केवल सेक्स ही नहीं, बल्कि हर काम में लिए स्फूर्ति और बल मिलता है.

Ayurvedic treatment bedwetting in hindi


बेड वेटिंग का आयुर्वेदिक उपचार

नींद में बिस्तर करने का मतलब है मूत्र का बेवश त्याग। आम तौर से 3 या 4 वर्ष की उम्र के बाद बच्चे अपने मूत्राशय पर काबू पा लेते हैं, पर कुछ बच्चों में यह प्रक्रिया कमज़ोर रह जाती है और ऐसे बच्चे अनजाने में और अनिच्छा से नींद में बिस्तर पर पेशाब कर देते हैं। यह हरकत कभी कभी15-20 वर्ष की उम्र तक चलती रहती है, जिससे कि बढ़ी हुई उम्र के बच्चे शर्मिंदगी महसूस करते हैं।और यह नींद में बिस्तर गीला करने की बीमारी लड़कियों के बनिबस्त लड़कों में अधिक पाई जाती है। इस रोग के कारण न सिर्फ बच्चे हंसी मज़ाक का विषय बन जाते हैं, बल्कि लौंड्री का खर्च भी बढ़ जाता है। उसके अलावा नींद के पैटर्न अव्यवस्थित हो जाते हैं और नींद की कमी के कारण अनेक समस्याएँ खड़ी हो जाती हैं।



नींद में बिस्तर गीला करने के कारण    
  • मूत्राशय की मांसपेशियों में असुंतलन।   
  • मूत्र की सामान्य मात्रा को पकडे रखने के लिये, अपेक्षा से छोटा मूत्राशय।   
  • शीत पेय या मूत्रवर्धक पेय का सेवन करने से, या मधुमेह या हार्मोन असुंतलन जैसी दीर्घकालीन बीमारी के कारण मूत्राशय में मूत्र का अधिक निर्माण होना।   

दिशा-निर्देश और आयुर्वेदिक उपचार    
  • बच्चे जान बूझकर बिस्तर गीला नहीं करते। उनका अपने आप पर नियंत्रण नहीं होता।उनपर गुस्सा करके या डांट कर या अपनी नाराजगी जताकर उन्हें अपने आपको कसूरवार न समझने दें, बल्कि समझदारी से काम लें।  
  • रात को सोने से पहले, गुनगुने दूध के साथ पाउडर के रूप में आयुर्वेदिक औषधि शसर्पा का सेवन करने से लाभ मिलता है।  
  • यह पता करने के प्रयास करें कि आपके बच्चे को पर्याप्त नींद मिलती है कि नहीं। सोने की सही समय-सारिणी से बच्चे को उठने में आसानी होगी जब उसे मूत्रत्याग का एहसास होगा।   
  • एक तवे पर धनिये के बीज को भून लें जब तक कि वह भूरे रंग के नहीं हो जाते। इनमे एक चम्मच अनार के फूल, तिल, और बबूल की गोंद मिलाकर एक मिश्रण बना लें और उनका चूरा बना लें। इसमें थोड़ी सी मिश्री मिलाकर सोते समय बच्चे को दें।       
  • बच्चे को आलू, हरे चने, चॉकलेट, चाय, कॉफ़ी और मसालेदार खान पान,   जिससे पेट में गैस बनता है, का सेवन न करायें। सोने से कुछ घंटे पहले तक किसी भी तरह के तरल पदार्थ का सेवन न करायें।  
  • सोने से दो तीन घंटे पहले बच्चे को अपना मूत्राशय खाली करने को कहें। फिर उसके   सोने के दो या तीन घंटे बाद का अलार्म लगाकर रखें ताकि उसे पेशाब करने के लिए जगाया जा सके।   
  • कभी कभी परिवार के किसी सदस्य या प्रिय मित्र की मृत्यु, माता-पिता का संबंध विच्छेद वगैरह, बच्चों में उच्च तनाव की वजह बनते हैं और नींद में बिस्तर गीला करने के कारण बन सकते हैं।     
  • बच्चे की भावनाओं को समझने के प्रयास करें और उनसे झूजने के लिए सकारात्मक कदम उठायें इससे पहले कि वह भावनाएं तनाव बनकर नींद में मूत्रत्याग के ज़रिये निष्काषित हों।     
  • नियमित आहार में अम्लाकी,अदरक, अजवाइन , जीरा, पुदीना और तुलसी वगैरह का समावेश करें। ब्राह्मी, शंखपुष्पी, जतमंसी वगैरह जैसी तनाव कम करने वाली औषधियों भी काफी असरदार होती हैं।  
  • सोने से पहले एक चम्मच शहद के प्रयोग से भी नींद में बिस्तर गीला करने पर नियंत्रण पाया जा सकता है।   
  • अन्य आयुर्वेदिक औषधियाँ हैं, विशातिन्दुका वटी, शिलाजीतवाड़ी वटी, चंद्रप्रभा वटी, वगैरह।   

Wednesday, November 19, 2014

Prevention Is Better Than Cure For Spinal Disorders In Hindi



कमर दर्द में इलाज से बेहतर क्यों है रोकथाम 

  • रीड़ की हड्डी संबंधी विकारों में इलाज से बेहतर, इससे बचाव होता है।
  • गलत मुद्रा, वर्कआउट में मांसपेशियों की चोट या मोच से होता है ये दर्द।
  • पुराने पीठ दर्द के लिए उपचार के अनेक माध्यम उपलब्ध हैं।
  • मांसपेशियों को मजबूत बनाने के व्यायाम कर समस्या से बचा जा सकाता है।

हम में से अधिकांश लोग पीठ दर्द से पीड़ित होते हैं, जो गलत मुद्रा में रहने, वर्कआउट के दौरान मांसपेशियों की चोट या मोच या फिर अचानक बैठने, झुकने या खड़े होने की वजह से हो सकता है। ज्यादातर मामलों में देखा जाता है कि जब किसी को कमर दर्द होता है तो वह इंसान थोड़े दिनों के लिए आराम करता है और फिर वापस से काम पर चला जाता है। अब ये दर्द आराम करने से चला तो जाता है लेकिन लोगों को नहीं पता होता कि यह दर्द दोबारा लौटकर आ सकता है। ये दर्द गलत मुद्रा में बैठने तथा कमर के कमजोर होने पर और भी बुरा हो जाता है। इसका मतलब तो यह हुआ कि लोग दर्द के दोबारा लौट आने का इंतजार ही करते हैं। ज्यादा समय तक लाइलाज रहने या स्थिति के गंभीर हो जाने पर दर्द बहुत ज्यादा हो जाता है और कमर व पैर में लगातार रहने लग सकता है। तो भला इस से बचाव बेहतर है या इलाज? यकीनन इससे बचाव ही ज्यादा बेहतर होगा। तो चलिये विस्तार से इस विषय पर बात करते हैं और जानते हैं कि खासतौर पर रीढ़ की हड्डी संबंधी विकारों में इलाज से बेहतर क्यों है रोकथाम।





पुराने पीठ दर्द के लिए उपचार के क्या विकल्प उपलब्ध हैं?

पुराने पीठ दर्द की समस्या का इलाज यदि लंबे समय तक न किया जाए तो यह एक गंभीर और कठीन प्रक्रिया बन जाती है। डॉक्टरों के पास भी लगभग 46 प्रतिशत लोग तीव्र समस्या वाले तथा 56 प्रतिशत पुरानी समस्या वाले होते हैं। इसका सीधा सा मतलब है कि लोग तब अपनी पीठ दर्द की समस्या का इलाज कराने आते हैं, जब वह गंभीर हो जाती है।

पीठ दर्द वाले लोगों को किस तरह की डाइट का पालन करना चाहिए?



पीठ दर्द वाले लोगों को विटामिन बी 12 तथा बी 3 की पर्याप्त मात्रा वाले खाद्य पदार्थों को अपनी डाइट में शामिल करने की सलाह दी जाती है। विटामिन बी 12 तंत्रिका और चयापचय स्वास्थ्य को बनाए रखता है तथा विटामिन बी 3 हड्डियों के स्वास्थ्य के रखरखाव में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लोग विटामिन बी 12 को दूध, मछली और दही जैसे खाद्य पदार्थों से प्राप्त कर सकते हैं। वहीं सुबह सुबह-सुबह सूरज के संपर्क में रहने से, विटामिन डी 3 की दैनिक आवश्यकता पूरी हो जाती है। इसके अलावा पीठ दर्द से पीड़ित लोगों को मशरूम, अंडे और बी कॉम्प्लेक्स विटामिन से भरपूर खाद्य पदार्थ खाने चाहिए।

डाइट में कैल्शियम और मिनरल्स का अभाव होना भी शरीर में दर्द का कारण बनता है। फास्ट फूड पर निर्भर रहने वाले लोग अक्सर अनियिमित डाइट लेते हैं, जिसमें पोषक तत्व नहीं होते। दर्द से बचने के लिए नियमित रूप से पौष्टिक आहार लें, जिसमें कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे मिनरल्स की पर्याप्त मात्रा हो। दूध, दही, पनीर जैसे डेरी पदार्थ भरपूर मात्रा में लें। इसके अलावा, विभिन्न विटामिन्स जैसे ए, सी, के, बी-12 युक्त खाद्य पदार्थ लेना भी ज़रूरी है। हरी सब्जियां, फिश, एग, टोफू, मूंगफली, ब्रॉक्ली, खुबानी, गाजर आदि लेना भी फायदेमंद रहता है।

क्या पीठ दर्द से पीड़ित लोग व्यायाम कर सकते हैं?

व्यायाम मांसपेशियों की कार्यप्रणाली में सुधार करता है और शरीर में रक्त के समुचित प्रवाह को बढ़ाता है। लेकिन कमर दर्द की स्थिति में कौंन सा व्यायाम किया जाए, इसके लिए एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें। व्यायाम के इलावा ऐसे में कुछ योग आसान जैसे, उत्तानासन, पश्चिमोत्तानासन तथा भुजंगासन आदि भी कर सकते हैं।

पुराने पीठ दर्द को कैसे रोकें?

पीठ दर्द का इसकी प्रारंभिक अवस्था में इलाज कर दिया जाता है, तो यह क्रोनिक नहीं बनता है। ऐसा अपनी मुद्रा में सुधार कर, मांसपेशियों को मजबूत बनाने के व्यायाम कर, लंबे समय तक के लिए आराम और ध्यान से अपने दिन-प्रतिदिन की गतिविधियों को कर किया जा सकता है।

कमर के लिए व्यायाम

-पीठ के बल लेट कर पैरों को ऊपर की दिशा में उठाएं और कमर को पांच सेकंड तक हवा में रोके कर रखें। ऐसा रोज़ाना सुबह-शाम दस-दस बार करें। इससे पीठ दर्द और कमर दर्द में आराम मिलता है।

-पेट के बल लेट कर हाथों को जमीन पर टिकाकर छाती और सिर को ऊपर की ओर उठाएं। ऐसा रोजाना सुबह-शाम दस-दस बार करें।

-सीधे खड़े होकर दोनों हाथ कमर पर टिकाएं और पीछे झुकने की कोशिश करें। यह व्यायाम भी दस बार करें। इसे करने से कमर के साथ ही कंधे और गर्दन के दर्द में भी आराम मिलता है।

घुटने के लिए व्यायाम

-पीठ के बल सीधे लेटकर घुटनों के नीचे तीन इंच का टॉवेल रोल बनाकर रखें। इसके बाद उसे घुटनों से पांच सेकंड तक दबाए रखें। इसके बाद ढीला छोड़ दें। ऐसा लगातार दस बार करें।

-सीधा लेटकर बारी-बारी से अपने पैरों को 45 डिग्री के एंगल पर सीधा उठाएं। दस सेकंड तक पैरों को इसी स्थिति में रोके रहें। फिर वापस उन्हें नीचे कर लें। यह क्रिया दस बार करें।

दर्द के लिए खास टिप्स



-नाइट शिफ्ट और ट्रैवलिंग जॉब करने वाले लोगों का स्लीपिंग पैटर्न अक्सर अनियमित होता है, जिससे सिरदर्द की समस्या होती है। इसलिए उन्हें खाने और सोने का समय निश्चित करना चाहिए।

-कुछ लोग बहुत मोटा तकिया लगाते हैं। वहीं, कुछ लोग सिर्फ गर्दन में ही तकिया लगाते हैं। ये दोनों ही तरीके गलत हैं। मध्यम आकार के तकिए को कंधे तक लगाना चाहिए, ताकि सोते वक्त कंधों को भी सपोर्ट मिले।

-काम के दौरान गर्दन को क्लॉकवाइज़ और एंटी-क्लॉकवाइज़ घुमाने की एक्सरसाइज़ करें।

-एंकल पेन से बचने के लिए गर्म पानी में पैर डालकर एंकल मूवमेंट करें। साथ ही पंजे के बल खड़े होने का उपक्रम करें।

योग

कुर्सी पर या जमीन पर रीढ़ को सीधी करके बैठ जाएं। चेहरे को दाएं कंधे की तरफ सुविधाजनक स्थिति तक ले जाएं। इसके बाद वापस पूर्व स्थिति में आ जाएं। इसके तुरंत बाद चेहरे को बाएं कंधे की ओर ले जाएं। पांच सेकंड तक इस स्थिति में रुककर वापस पूर्व स्थिति में आएं। अब सिर को पीछे की ओर आरामदायक स्थिति तक ले जाएं। थोड़ी देर इस स्थिति में रुकने के बाद पूर्व स्थिति में आएं। सिर को सामने की ओर न झुकने दें।

दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में गूंथकर हथेलियों को सिर के पीछे मेडुला पर रख कर हथेलियों से सिर को आगे की ओर तथा सिर से हाथों को पीछे की ओर पूरे जोर के साथ इस प्रकार दबाव दीजिए कि हाथ तथा सिर अपनी जगह से हिले-डुले नहीं। इसके बाद हथेलियों को माथे पर रख कर दबाव डालिए। अंत में हथेलियों से ठुड्डी को पूरे जोर के साथ दबाएं। यह पांच-पांच बार दोहराएं।

- समुद्रशोख नामक पौधे का चूर्ण तैयार किया जाए और इस चूर्ण की करीब 1-3 ग्राम मात्रा लेकर दूध में मिलाकर लिया जाए तो जोड़ दर्द में राहत मिलती है।

- दूब, अदरक, दालचीनी और लौंग की समान मात्रा लेकर गुड़ के पानी में खौलाते हैं और रोगी को करीब 5 मिली पीने के लिए देते हैं। माना जाता है कि दिन में एक बार लगातार 1 माह तक इसे लेने से जोड़ों का दर्द छूमंतर हो जाता है।

- पारिजात की 6-7 ताजी पत्तियों को अदरक के रस साथ कुचल लिया जाए और शहद मिलाकर सेवन किया जाए तो बदन दर्द और जोड़ों के दर्द में काफी आराम मिलता है। माना जाता है कि इसके सेवन से साइटिका जैसे रोग में भी काफी फायदा होता है।





- करीब 8-10 लहसुन की कलियों को तेल या घी के साथ फ्राय कर लिया जाए और खाने से पहले चबाया जाए तो जोड़ों के दर्द में तेजी से आराम मिलता है। ऐसा प्रतिदिन किया जाना चाहिए। डांग, गुजरात के हर्बल जानकारों का मानना है कि लहसुन की कलियों को सरसों के तेल के साथ कुचलकर गर्म किया जाए और कपूर मिलाकर जोड़ों या दर्द वाले हिस्सों पर लगाकर मालिश की जाए तो आराम मिलता है।

- पुनर्नवा के पौधे, आमा हल्दी और अदरक की समान मात्रा को कुचलकर पानी में उबाला जाए और काढ़ा तैयार कर पिया जाए तो बदन दर्द और जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है।

- प्याज के रस को सरसों के तेल में मिलाकर जोड़ो पर मालिश करने से आमवात और जोड़ दर्द में आराम मिलता है। माना जाता है कि इस नुस्खे को दो महीनों तक लगातार आजमाया जाए, तो बहुत फायदा होता है।

- प्रायः प्याज सफेद और लाल रंग के होते हैं। सफेद प्याज हृदय के लिए गुणकारी होता है, जबकि लाल प्याज बलदायक होता है। गर्मियों में माथे में दर्द होने पर प्याज के सफेद कंद को तोड़कर सूंघने और चंदन में कपूर घिसकर ललाट पर लगाने से अतिशीघ्र आराम मिलता है।

Monday, November 17, 2014

Myth facts about calcium in hindi

कैल्शियम से सम्बन्धी भ्रम और तथ्य


  • कैल्शियम शरीर के लिए जरूरी तत्व है।
  • कैल्शियम की कितनी मात्रा लेनी है इसकी जानकारी जरूरी है।
  • दांतों और नाखूनों के लिए कैल्शियम जरूरी है।
  • कैल्शियम की ज्यादा मात्रा के नुकसान भी होते हैं।


कैल्शियम हमारे शरीर के लिए जरूरी तत्वों में से एक है। स्वस्थ हड्डियों के लिए जरूरी है कि आपके शरीर में पर्याप्त कैल्शियम हो क्योंकि जब शरीर में पर्याप्त कैल्शियम होती है तो वह आपके चेहरे पर झलकती है अंदरूनी मजबूती के तौर पर। लेकिन कैल्शियम को लेकर कई तरह के भ्रम भी फैले हुए हैं। आइए जानें कैल्शियम से जुड़े भ्रम और तथ्य के बारे में।

मजबूत हड्डियां पायें और कैल्शियम से सम्बन्धी भ्रम को तोड़ें

कैल्शियम से सम्बन्धी चुनौती सदियों से चली आ रही है और यह स्थिति आज भी वैसी ही है। कुछ लोगों का ऐसा मानना है कि कैल्शियम के पूरक लेने से हड्डियां मजबूत और स्वस्थ होती हैं और आस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारी के दूर रहने के साथ साथ हड्डियों के टूटने का भी खतरा कम होता है। लेकिन कुछ लोगों का ऐसा भी मानना है कि कैल्शियम के रूपक लेने से इनके अतिरिक्त प्रभाव होते हैं। इसलिए कैल्शियम से सम्बन्धी भ्रम का समाधान निकालने के लिए यहां कई प्रकार के भ्रम का समाधान निकाला जा रहा है।

प्रतिदिन मुझे किस मात्रा में कैल्शियम लेना चाहिए ?

विशेषज्ञों के अनुसार एक वयस्क व्यक्ति (जिसकी उम्र 19 से 50 वर्ष हो ) उसे दिनभर में लगभग 1,000 मिलीग्राम कैल्शियम लेना चाहिए और 50 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्ति को 1,200 मिलीग्राम कैल्शियम की मात्रा लेनी चाहिए। यह मात्रा किसी भी प्रकार के कैल्शियम स्रोत की हो सकती है जैसे डेयरी उत्पाद ,खाद्य पेय आदि। लेकिन कुछ लोगों का ऐसा मानना है कि दिन में लगभग 600 मीलिग्राम से 1000 मिली ग्राम ही बहुत है।


अगर मैं कैल्शियम के पूरक पर नहीं निर्भर होना चाहता तो मुझे किस मात्रा में कैल्शियम लेना चाहिए ?

एक स्वस्थ आहार का अर्थ है दिन में 200 से 300 मिलीग्राम कैल्शियम लेना। इसमें फल और सब्ज़ियां होनी चाहिए जैसे बीज ,अनाज और हरी पत्तेदार सब्ज़ियां। लेकिन 1 कप दूध से शरीर में 300 मिलीग्राम कैल्शियम की मात्रा जुड़ जाती है और दही से 150 से 200 मिलाग्राम कैल्शियम। सभी दूध के उत्पादों को अपने आहार में शामिल कर और कुछ मात्रा में फल और सब्ज़ियां लेने से शरीर में 600 से 800 मिलीग्राम कैल्शियम की आपूर्ति होती है।


अगर मैं कैल्शियम के पूरक लेना चाहूं तो इन्हें किस तरह से लेना चाहिए।



स्वास्थ्य चिकित्सकों का ऐसा मानना है कि कैल्शियम के पूरक कैल्शियम साइट्रेट या कैल्शियम कार्बोनेट से बने होते हैं । कैल्शियम के पूरक जिनमें पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम कार्बोनेट होती है उन्हें खाने के बाद लेना चाहिए क्योंकि उन्हें पेट में मौजूद एसिड को अवशोषित करने की ज़रूरत होती है। कैल्शियम साइट्रेट पेट में मौजूद एसिड पर निर्भर नहीं होता और इसलिए इसे दिन में किसी भी समय लिया जा सकता है।


क्या कैल्शियम लेकर फ्रैक्चर से बचा जा सकता है ?

विशेषज्ञों का ऐसा मानना है कि बहुत अधिक मात्रा में कैल्शियम लेने का अर्थ यह नहीं है कि हमारे रक्त में अधिक मात्रा में कैल्शियम होगा। अगर रक्त में कैल्शियम अधिक मात्रा में नहीं है हड्डियों के रिज़र्पशन से वो सामान्य स्थिति में आ जाती है और ऐसे में हड्डियां और कमज़ोर हो जाती हैं जिससे कि फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है।

क्या अधिक मात्रा में कैल्शियम लेने से गुर्दे की पथरी हो सकती है ?

अधिकतर स्थितियों में ऐसा पाया गया है कि 80 से 85 प्रतिशत स्थितियों में पथरी कैल्शियम से बनी होती है। लेकिन सदियों से हो रहे शोधों से ऐसा पता चला है कि आहार के माध्यम से अधिक मात्रा में कैल्शियम लेने से गुर्दे की पथरी का खतरा कम हो जाता है ा ऐसा इसलिए होता है क्योंकि कैल्शियम से आक्ज़लेट का अवशोषण कम हो जाता है।

आक्ज़लेट वो अणु है जो कैल्शियम से जुड़कर गुर्दे की पथरी का कारण बन सकता है।दूसरे कई शोधों से भी ऐसा ही पता चला है कि हम सभी आहार के पोषण मूल्यों को दवाओं और पूरक की तुलना में आहार से कहीं आसानी से ले सकते हैं। विशेषज्ञों का ऐसा मानना है कि दूध के उत्पाद और दही खनिज के आदर्श स्रोत हैं। इसके विरोध में कुछ शोधों के अनुसार डेयरी के आहार से कैंसर का भी खतरा हो सकता है।

अंततः यह ना केवल मानी हुई बात है बल्कि यह एक राय भी है कि जिन सब्जियों में कैल्शियम अधिक मात्रा में होता है जैसे पालक ,अम्लान , बोनी मछली,सहजन उन्हें अधिक मात्रा में लेना चाहिए क्योंकि इनसे शरीर में कैल्शियम की आपूर्ति होती है।

Kamar dard door karne ke gharelu upchaar


कमर दर्द भगाने के घरेलू उपाय

  • जीवनशैली है कमर दर्द की बड़ी वजह।
  • व्यायाम से पाया जा सकता है इस पर काबू।
  • योग को अपने जीवन का हिस्सा बनायें।
  • अपने वजन को काबू में रखकर पायें राहत

कमर दर्द की यह समस्या आजकल आम हो गई है। सिर्फ बड़ी उम्र के लोग ही नहीं बल्कि युवा भी कमर दर्द की शिकायत करते रहते हैं। कमर दर्द की मुख्य वजह बेतरतीब जीवनशैली और शारीरिक श्रम न करना है।

अधिकतर लोगों को कमर के मध्य या निचले भाग में दर्द महसूस होता है। यह दर्द कमर के दोनों और तथा कूल्हों तक भी फ़ैल सकता है। बढ़ती उम्र के साथ कमर दर्द की समस्या बढ़ती जाती है। नतीजा काम करने में परेशानी । कुछ आदतों को बदलकर इससे काफी हद तक बचा जा सकता है। आज हम आप को बताते हैं कि किन घरेलू नुस्खों को अपनाकर आप कमर दर्द से निजात पा सकते हैं।

क्यों होता है कमर दर्द

  1. मांसपेशियों पर अत्यधिक तनाव।
  2. अधिक वजन।
  3. गलत तरीके से बैठना।
  4. हमेशा ऊंची एड़ी के जूते या सेंडिल पहनना।
  5. गलत तरीके से अधिक वजन उठाना।
  6. शरीर में लम्बे समय से बीमारियों का होना।
  7. अधिक नर्म गद्दों पर सोना। 
कमर दर्द से बचने के घरेलू उपाय

1. रोज सुबह सरसों या नारियल के तेल में लहसुन की तीन-चार कलियॉ डालकर (जब तक लहसुन की कलियां काली न हो जायें) गर्म कर लें। ठंडा होने पर इस तेल से कमर की मालिश करें।

2. नमक मिले गरम पानी में एक तौलिया डालकर निचोड़ लें। इसके बाद पेट के बल लेट जाएं। दर्द के स्थान पर तौलिये से भाप लें। कमर दर्द से राहत पहुंचाने का यह एक अचूक उपाय है।

3. कढ़ाई में दो-तीन चम्मच नमक डालकर इसे अच्छे से सेक लें। इस नमक को थोड़े मोटे सूती कपड़े में बांधकर पोटली बना लें। कमर पर इस पोटली से सेक करने से भी दर्द से आराम मिलता है।

4. अजवाइन को तवे के पर थोड़ी धीमी आंच पर सेंक लें। ठंडा होने पर धीरे-धीरे चबाते हुए निगल जाएं। इसके नियमित सेवन से कमर दर्द में लाभ मिलता है।

5. अधिक देर तक एक ही पोजीशन में बैठकर काम न करें। हर चालीस मिनट में अपनी कुर्सी से उठकर थोड़ी देर टहल लें।

6. नर्म गद्देदार सीटों से परहेज करना चाहिए। कमर दर्द के रोगियों को थोड़ा सख्ते बिस्तर बिछाकर सोना चाहिए।

7. योग भी कमर दर्द में लाभ पहुंचाता है। भुन्ज्गासन, शलभासन, हलासन, उत्तानपादासन, श्वसन आदि कुछ ऐसे योगासन हैं जो की कमर दर्द में काफी लाभ पहुंचाते हैं। कमर दर्द के योगासनों को योगगुरु की देख रेख में ही करने चाहिए।

8. कैल्शियम की कम मात्रा से भी हड्डियां कमजोर हो जाती हैं, इसलिए कैल्शियमयुक्त चीजों का सेवन करें।

9. कमर दर्द के लिए व्यायाम भी करना चाहिए। सैर करना, तैरना या साइकिल चलाना सुरक्षित व्यायाम हैं। तैराकी जहां वजन तो कम करती है, वहीं यह कमर के लिए भी लाभकारी है। साइकिल चलाते समय कमर सीधी रखनी चाहिए। व्यायाम करने से मांसपेशियों को ताकत मिलेगी तथा वजन भी नहीं बढ़ेगा।

10. कमर दर्द में भारी वजन उठाते समय या जमीन से किसी भी चीज को उठाते समय कमर के बल ना झुकें बल्कि पहले घुटने मोड़कर नीचे झुकें और जब हाथ नीचे वस्तु तक पहुंच जाए तो उसे उठाकर घुटने को सीधा करते हुए खड़े हो जाएं।

11. कार चलाते वक्त सीट सख्त होनी चाहिए, बैठने का पोश्चर भी सही रखें और कार ड्राइव करते समय सीट बेल्ट टाइट कर लें।

12. ऑफिस में काम करते समय कभी भी पीठ के सहारे न बैठें। अपनी पीठ को कुर्सी पर इस तरह टिकाएं कि यह हमेशा सीधी रहे। गर्दन को सीधा रखने के लिए कुर्सी में पीछे की ओर मोटा तौलिया मोड़ कर लगाया जा सकता है।

इन सब उपायों को अपना कर आप भी कमर दर्द से कुछ निजात पा सकते है।

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