Wednesday, November 19, 2014

Prevention Is Better Than Cure For Spinal Disorders In Hindi



कमर दर्द में इलाज से बेहतर क्यों है रोकथाम 

  • रीड़ की हड्डी संबंधी विकारों में इलाज से बेहतर, इससे बचाव होता है।
  • गलत मुद्रा, वर्कआउट में मांसपेशियों की चोट या मोच से होता है ये दर्द।
  • पुराने पीठ दर्द के लिए उपचार के अनेक माध्यम उपलब्ध हैं।
  • मांसपेशियों को मजबूत बनाने के व्यायाम कर समस्या से बचा जा सकाता है।

हम में से अधिकांश लोग पीठ दर्द से पीड़ित होते हैं, जो गलत मुद्रा में रहने, वर्कआउट के दौरान मांसपेशियों की चोट या मोच या फिर अचानक बैठने, झुकने या खड़े होने की वजह से हो सकता है। ज्यादातर मामलों में देखा जाता है कि जब किसी को कमर दर्द होता है तो वह इंसान थोड़े दिनों के लिए आराम करता है और फिर वापस से काम पर चला जाता है। अब ये दर्द आराम करने से चला तो जाता है लेकिन लोगों को नहीं पता होता कि यह दर्द दोबारा लौटकर आ सकता है। ये दर्द गलत मुद्रा में बैठने तथा कमर के कमजोर होने पर और भी बुरा हो जाता है। इसका मतलब तो यह हुआ कि लोग दर्द के दोबारा लौट आने का इंतजार ही करते हैं। ज्यादा समय तक लाइलाज रहने या स्थिति के गंभीर हो जाने पर दर्द बहुत ज्यादा हो जाता है और कमर व पैर में लगातार रहने लग सकता है। तो भला इस से बचाव बेहतर है या इलाज? यकीनन इससे बचाव ही ज्यादा बेहतर होगा। तो चलिये विस्तार से इस विषय पर बात करते हैं और जानते हैं कि खासतौर पर रीढ़ की हड्डी संबंधी विकारों में इलाज से बेहतर क्यों है रोकथाम।





पुराने पीठ दर्द के लिए उपचार के क्या विकल्प उपलब्ध हैं?

पुराने पीठ दर्द की समस्या का इलाज यदि लंबे समय तक न किया जाए तो यह एक गंभीर और कठीन प्रक्रिया बन जाती है। डॉक्टरों के पास भी लगभग 46 प्रतिशत लोग तीव्र समस्या वाले तथा 56 प्रतिशत पुरानी समस्या वाले होते हैं। इसका सीधा सा मतलब है कि लोग तब अपनी पीठ दर्द की समस्या का इलाज कराने आते हैं, जब वह गंभीर हो जाती है।

पीठ दर्द वाले लोगों को किस तरह की डाइट का पालन करना चाहिए?



पीठ दर्द वाले लोगों को विटामिन बी 12 तथा बी 3 की पर्याप्त मात्रा वाले खाद्य पदार्थों को अपनी डाइट में शामिल करने की सलाह दी जाती है। विटामिन बी 12 तंत्रिका और चयापचय स्वास्थ्य को बनाए रखता है तथा विटामिन बी 3 हड्डियों के स्वास्थ्य के रखरखाव में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लोग विटामिन बी 12 को दूध, मछली और दही जैसे खाद्य पदार्थों से प्राप्त कर सकते हैं। वहीं सुबह सुबह-सुबह सूरज के संपर्क में रहने से, विटामिन डी 3 की दैनिक आवश्यकता पूरी हो जाती है। इसके अलावा पीठ दर्द से पीड़ित लोगों को मशरूम, अंडे और बी कॉम्प्लेक्स विटामिन से भरपूर खाद्य पदार्थ खाने चाहिए।

डाइट में कैल्शियम और मिनरल्स का अभाव होना भी शरीर में दर्द का कारण बनता है। फास्ट फूड पर निर्भर रहने वाले लोग अक्सर अनियिमित डाइट लेते हैं, जिसमें पोषक तत्व नहीं होते। दर्द से बचने के लिए नियमित रूप से पौष्टिक आहार लें, जिसमें कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे मिनरल्स की पर्याप्त मात्रा हो। दूध, दही, पनीर जैसे डेरी पदार्थ भरपूर मात्रा में लें। इसके अलावा, विभिन्न विटामिन्स जैसे ए, सी, के, बी-12 युक्त खाद्य पदार्थ लेना भी ज़रूरी है। हरी सब्जियां, फिश, एग, टोफू, मूंगफली, ब्रॉक्ली, खुबानी, गाजर आदि लेना भी फायदेमंद रहता है।

क्या पीठ दर्द से पीड़ित लोग व्यायाम कर सकते हैं?

व्यायाम मांसपेशियों की कार्यप्रणाली में सुधार करता है और शरीर में रक्त के समुचित प्रवाह को बढ़ाता है। लेकिन कमर दर्द की स्थिति में कौंन सा व्यायाम किया जाए, इसके लिए एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें। व्यायाम के इलावा ऐसे में कुछ योग आसान जैसे, उत्तानासन, पश्चिमोत्तानासन तथा भुजंगासन आदि भी कर सकते हैं।

पुराने पीठ दर्द को कैसे रोकें?

पीठ दर्द का इसकी प्रारंभिक अवस्था में इलाज कर दिया जाता है, तो यह क्रोनिक नहीं बनता है। ऐसा अपनी मुद्रा में सुधार कर, मांसपेशियों को मजबूत बनाने के व्यायाम कर, लंबे समय तक के लिए आराम और ध्यान से अपने दिन-प्रतिदिन की गतिविधियों को कर किया जा सकता है।

कमर के लिए व्यायाम

-पीठ के बल लेट कर पैरों को ऊपर की दिशा में उठाएं और कमर को पांच सेकंड तक हवा में रोके कर रखें। ऐसा रोज़ाना सुबह-शाम दस-दस बार करें। इससे पीठ दर्द और कमर दर्द में आराम मिलता है।

-पेट के बल लेट कर हाथों को जमीन पर टिकाकर छाती और सिर को ऊपर की ओर उठाएं। ऐसा रोजाना सुबह-शाम दस-दस बार करें।

-सीधे खड़े होकर दोनों हाथ कमर पर टिकाएं और पीछे झुकने की कोशिश करें। यह व्यायाम भी दस बार करें। इसे करने से कमर के साथ ही कंधे और गर्दन के दर्द में भी आराम मिलता है।

घुटने के लिए व्यायाम

-पीठ के बल सीधे लेटकर घुटनों के नीचे तीन इंच का टॉवेल रोल बनाकर रखें। इसके बाद उसे घुटनों से पांच सेकंड तक दबाए रखें। इसके बाद ढीला छोड़ दें। ऐसा लगातार दस बार करें।

-सीधा लेटकर बारी-बारी से अपने पैरों को 45 डिग्री के एंगल पर सीधा उठाएं। दस सेकंड तक पैरों को इसी स्थिति में रोके रहें। फिर वापस उन्हें नीचे कर लें। यह क्रिया दस बार करें।

दर्द के लिए खास टिप्स



-नाइट शिफ्ट और ट्रैवलिंग जॉब करने वाले लोगों का स्लीपिंग पैटर्न अक्सर अनियमित होता है, जिससे सिरदर्द की समस्या होती है। इसलिए उन्हें खाने और सोने का समय निश्चित करना चाहिए।

-कुछ लोग बहुत मोटा तकिया लगाते हैं। वहीं, कुछ लोग सिर्फ गर्दन में ही तकिया लगाते हैं। ये दोनों ही तरीके गलत हैं। मध्यम आकार के तकिए को कंधे तक लगाना चाहिए, ताकि सोते वक्त कंधों को भी सपोर्ट मिले।

-काम के दौरान गर्दन को क्लॉकवाइज़ और एंटी-क्लॉकवाइज़ घुमाने की एक्सरसाइज़ करें।

-एंकल पेन से बचने के लिए गर्म पानी में पैर डालकर एंकल मूवमेंट करें। साथ ही पंजे के बल खड़े होने का उपक्रम करें।

योग

कुर्सी पर या जमीन पर रीढ़ को सीधी करके बैठ जाएं। चेहरे को दाएं कंधे की तरफ सुविधाजनक स्थिति तक ले जाएं। इसके बाद वापस पूर्व स्थिति में आ जाएं। इसके तुरंत बाद चेहरे को बाएं कंधे की ओर ले जाएं। पांच सेकंड तक इस स्थिति में रुककर वापस पूर्व स्थिति में आएं। अब सिर को पीछे की ओर आरामदायक स्थिति तक ले जाएं। थोड़ी देर इस स्थिति में रुकने के बाद पूर्व स्थिति में आएं। सिर को सामने की ओर न झुकने दें।

दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में गूंथकर हथेलियों को सिर के पीछे मेडुला पर रख कर हथेलियों से सिर को आगे की ओर तथा सिर से हाथों को पीछे की ओर पूरे जोर के साथ इस प्रकार दबाव दीजिए कि हाथ तथा सिर अपनी जगह से हिले-डुले नहीं। इसके बाद हथेलियों को माथे पर रख कर दबाव डालिए। अंत में हथेलियों से ठुड्डी को पूरे जोर के साथ दबाएं। यह पांच-पांच बार दोहराएं।

- समुद्रशोख नामक पौधे का चूर्ण तैयार किया जाए और इस चूर्ण की करीब 1-3 ग्राम मात्रा लेकर दूध में मिलाकर लिया जाए तो जोड़ दर्द में राहत मिलती है।

- दूब, अदरक, दालचीनी और लौंग की समान मात्रा लेकर गुड़ के पानी में खौलाते हैं और रोगी को करीब 5 मिली पीने के लिए देते हैं। माना जाता है कि दिन में एक बार लगातार 1 माह तक इसे लेने से जोड़ों का दर्द छूमंतर हो जाता है।

- पारिजात की 6-7 ताजी पत्तियों को अदरक के रस साथ कुचल लिया जाए और शहद मिलाकर सेवन किया जाए तो बदन दर्द और जोड़ों के दर्द में काफी आराम मिलता है। माना जाता है कि इसके सेवन से साइटिका जैसे रोग में भी काफी फायदा होता है।





- करीब 8-10 लहसुन की कलियों को तेल या घी के साथ फ्राय कर लिया जाए और खाने से पहले चबाया जाए तो जोड़ों के दर्द में तेजी से आराम मिलता है। ऐसा प्रतिदिन किया जाना चाहिए। डांग, गुजरात के हर्बल जानकारों का मानना है कि लहसुन की कलियों को सरसों के तेल के साथ कुचलकर गर्म किया जाए और कपूर मिलाकर जोड़ों या दर्द वाले हिस्सों पर लगाकर मालिश की जाए तो आराम मिलता है।

- पुनर्नवा के पौधे, आमा हल्दी और अदरक की समान मात्रा को कुचलकर पानी में उबाला जाए और काढ़ा तैयार कर पिया जाए तो बदन दर्द और जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है।

- प्याज के रस को सरसों के तेल में मिलाकर जोड़ो पर मालिश करने से आमवात और जोड़ दर्द में आराम मिलता है। माना जाता है कि इस नुस्खे को दो महीनों तक लगातार आजमाया जाए, तो बहुत फायदा होता है।

- प्रायः प्याज सफेद और लाल रंग के होते हैं। सफेद प्याज हृदय के लिए गुणकारी होता है, जबकि लाल प्याज बलदायक होता है। गर्मियों में माथे में दर्द होने पर प्याज के सफेद कंद को तोड़कर सूंघने और चंदन में कपूर घिसकर ललाट पर लगाने से अतिशीघ्र आराम मिलता है।

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